पिंजड़े में सब कुछ स्याह कर लिया है ................
आंख बंद कर खुद को अकेला कर लिया है ..................
हर तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा पसरा है ...............
साँसों ने दरकार से किनारा कर लिया है .................सोने से पहले हम रोज इसी तरह खुद के मरने का अभ्यास करते है ..........शायद हम करते भी है पर मानते नहीं ................ना मानिये पर आज सोचियेगा जरुर .........शुभ रात्रि
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