जिन्दगी पे सवार साँसों का काफिला जब गुजरा ......................न जाने कितनो ने देखा और जी भी लिया .....................पर कोई तो था जो मरा तिल तिल करके ....................मेरे जिन्दा रहने पर हर दिन .............................शायद कदमो की आहट बन ही गयी ....................उसके लिए जैसे कोठे का कोई मुजरा ......................कोई ना जान पाया यहाँ आने का अपना सबब .....................बस भागते रहे एक हाथ छोड़ दूसरे का मिसरा...................
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