मिट्टी से जुड़ना सीखो
मिट्टी का क्या है कोई भी
बीज उसमें बो दिया जाता है
मिट्टी की उष्णता के आगे वह
फिर क्या कुछ कर पाता है
उसके पास सिर्फ और सिर्फ
एक यही रास्ता शेष बचता है
कि बीच ने अंदर जो भी आज तक
उसने छुपा कर रखा था
उसे मिट्टी के दरवाजे को तोड़कर
दुनिया में अपने को रचता बसता है
मिट्टी को भी कहां एहसास होता है
किसी भी दर्द का जब
एक बीज उसके अंदर समाता है
फिर उसी के मिट्टी को फोड़ कर
तोड़कर वह इस संसार में बाहर आता है
मिट्टी तो बस खुश हो जाती है
यह सोच कर कि उसे बीज की जड़
आज भी उससे जुड़ी हुई है
बीज ने जिस पौधे को खड़ा किया है
वह मिट्टी के साथ मिली हुई है
बीज को भी कब दुख होता है
कि उसका अस्तित्व मिट्टी के
गहन अंधकार में समाप्त हो गया है
वह तो मिट्टी के अंदर उसकी उष्णता से
बस उसी का होकर रह गया है
वह दुनिया में खुद नहीं
बाहर आना चाहता है
मिट्टी और मिट्टी के साथ रहने का सच
वह दुनिया को सिर्फ बताना चाहता है
इसीलिए एक दिन मिट्टी को तोड़कर
वह पौधे के रूप में बाहर आना चाहता है
और मिट्टी मैं सृजन के कौन से सुर छिपे हुए थे
वह दुनिया को दिखाना चाहता है
भला कौन नहीं मिट्टी और बीज के
इस दर्शन को समझ पाता है
तभी तो कोई एक पौधे का फल फूल
और कोई एक पेड़ की छाया के तले चला आता है
सच बस यही इस दुनिया में रह जाता है
कि अपने अंदर के हर वैभव
गुण का प्रदर्शन वही कर पाता है
जो बीज की तरह एक दिन
अपनी मिट्टी से पूरा जुड़ जाता है
आलोक चांटिया "रजनीश"

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