Monday, July 20, 2026

तुम युवा नहीं, वायु हो डॉ आलोक चांटिया रजनीश अखिल भारतीय अधिकार संगठन

 

तुम युवा नहीं, वायु हो

डॉ आलोक चांटिया रजनीश अखिल भारतीय अधिकार संगठन

तुम युवा नहीं, वायु हो, अपनी पहचान करो,
बिखरी शक्ति को समेटो, नव निर्माण करो।

ऊर्जा की हर एक किरण, इतिहास बदल सकती है,
जेम्स वाट की सोच बनो, दुनिया सँवर सकती है।

जो भीतर अग्नि जलती है, उसका सम्मान करो,
व्यर्थ न उसे लुटाओ, जीवन का उत्थान करो।

भीड़ के पीछे मत भागो, विवेक का दीप जलाओ,
अंधेरे के हर पथ पर, अपना सूरज ले आओ।

घर की आँखें राह निहारें, उनका भी अधिकार है,
देश तुम्हारे कंधों पर ही लिखता नया विचार है।

भगत, सुखदेव, आज़ादों का साहस फिर अपनाओ,
राजेंद्र लाहिड़ी के पथ पर जीवन सफल बनाओ।

कंस-रावण की राह नहीं, रामत्व का विस्तार करो,
भारत माँ के स्वर्णिम सपनों का साकार करो।

अंधियारे में आलोक बनो, हर मन में प्रकाश भरो,
मुट्ठी में अपनी शक्ति रखो, नवयुग का विश्वास भरो।

रेल बने यह शक्ति तुम्हारी, पत्थर नहीं गिराएगी,
सृजन की हर नई कहानी, भारत को मुस्काएगी।

यदि ऊर्जा का सही मार्ग तुम हर दिन चुनते जाओगे,
विकसित भारत के स्वप्न को सचमुच साकार बनाओगे।

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