Tuesday, June 22, 2021

An endeavor for NATIONAL FLAG BY ALL INDIAN RIGHTS ORGANIZATION

 #राष्ट्रीय  ध्वज  # तिरंगा  # झंडा 

इस देश में तिरंगे को भी राजनैतिक सियासत में रंगने की कोशिश जारी है और इसी लिए जब एक शराब पीकर मरने वाली अभी नेत्री श्री देवी को तिरंगे में लपेटा गया तो अखिल भारतीय अधिकार संगठन को ये हर उस भारतीय का अपमान लगा जो तिरंगे को सलामी देता हा और संगठन ने सरकार से एक शराब पीकर मरने वाली महिला श्री देवी को तिरंगे दिए जाने पर स्पष्टि करण माँगा कई बार तलने के बाद अंततः केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेज कर जवाब माँगा है कि एस अक्यो किया गया ...मेरा हर भारतीय से निवेदन है कि सोशल मीडिया प् र्लादने के बजाये वास्तव में तरंगे के सम्मान के लिए बहस करें क्योकि यही वो प्रतीक है जिसके आधा रप रपने को स्वतंत्र कहते है ..............आप सभी का धन्यवाद ..डॉ आलोक चान्टिया, अखिल भारतीय अधिकार संगठन


मौत की बात जब कभी भी तुमसे करता हूँ



 

जब तुम मुझे दुखी देखते हो



 

तारों की बारात देखने को मिल जाती है




 

कोई नहीं मैं निपट अकेला .............

 कोई नहीं मैं निपट अकेला .............

चारदीवारी से करता बातें ................

पत्थर के भगवान सही ................

संग उनके कटती है रातें ..............

सो जाता जब नींद में गहरी ...............

भगवान सभी चिल्लाते है .......................

हमें अकेला निपट छोड़ क्यों  .................

मानव खुद सो जाता है .................

सर पटकते , रोते रहते ................

जब मंदिर में मेरे आते है .................

कमरों में लटका फिर हमको ...............

पहरेदारी रात करवाते है ...................  जब आप अपने को अकेला कहते है तो सीधे भगवान के अस्तित्व को नकारते है और तब उस भगवान को कितनी पीड़ा होती होगी जो आपके घर में २४ घंटे दिवार पे लटक कर , मंदिर में बैठ कर आपको बचत है ...यानि मानव भागवान का मूल्य तक अनहि समझता और फिर जब भगवान उदासीन होता है तो सिर्फ तांडव होता है ......मौर का सैलाब आता है ........आप मानिये चाहे न मानिये 

Saturday, June 19, 2021

ये सच है कि , मैं तेरा दौर नहीं

 विश्व योग दिवस पर आप सभी को शुभकामना एक बार किसान के इस योग को भी पहचानिए


किसान के इस योग को पहचानिए 

ये सच है कि ,

मैं तेरा दौर नहीं ,

ये झूठ है ,

कि अब और नहीं ,

इस दुनिया में ,

आकर जाना भी है ,

कोई करे कितने जतन ,

पर ये किसी का ठौर नहीं|

ये सच है कि 

मैं तेरा दौर नहीं ...

........आलोक चान्टिया

आदमी के बीच में आदमी .............., खुद को अब अकेला पाता है

 आदमी के बीच में आदमी ..............,

खुद को अब अकेला पाता है .............

दर्द किसी को भी हो तो ....................

कौन दौड़ कर अब आता है ................

सड़क पर कुत्ता रुक जाता है ............

वह अपने को जब मरा पाता है ...............

बैठता है रोता है रात भर .................

बिना कुछ खाए पिए उदास ...............

कई और आ जाते है पास ..................

क्योकि वो जानते है आदमी ...............

नहीं आज कुत्ता कुचला है यहाँ .................

वरना आदमी मर जाते है ..............

और आदमी के पास वक्त कहा ............

रोज की तरह खाते है पीकर ...................

कहते है जो मरे क्या मिला जीकर ...........

क्या जरूरत थी कही जाने की ..............

जरूरत रही होगी मोक्ष पाने की ...............

बेवजह सुबह से शाम तक बस .....................

मरने मरने की खबर हर कही ................

क्या हम पैदा दुःख मनाने को कही ................

देखो आज मैच आ रहा होगा .................

जिसने जो किया वो भोगा......................

तभी कुत्ते फिर थे रोये कही .................

बाहर देखो कोई कुत्ता मारा होगा .................

अब साले रात भर मातम मनाएंगे .................

औ हम मानव की नींद खा जायेंगे ....................

ये साली सरकार क्या कर रही है ..................

मरने वालो को कितना दे रही है .................

काश कोई अपना उत्तराखंड जाता ...............

मरने वालो के पैसे ही ले आता ................

साले ये सरकारी लोग खा जायेंगे ...............

हम तो बस दर्द ढ़ोते रह जायेंगे ...................

कितनी फुर्सत है लोगो के पास ....................

जाने वालो पर समय बर्बाद करते है ...................

अरे  जो आया है वो जायेगा ही .......................

हम क्यों अपनी नींद ख़राब करते है ...................

वैसे भी साले कुत्ते गाना गायेंगे ही ........................

अपने किसी मरने वाले का सिजरा........................

मुहल्ले वाले को सुनायेंगे ही .........


आप लोग मेरी लाइन्स पर बुरा मत मानियेगा पर ये सच है की अगर कोई मानव हमारा सगा सम्बन्धी अहि है तो हमको कोई दर्द होता ही नहीं है मानो सबको गीता का ज्ञान हो चुका