Thursday, January 23, 2020

मताधिकार ......मताधिकार

मताधिकार ......मताधिकार
प्रजातंत्र का देखो ये ,
अद्भुत सा हथियार
देश को हम बदल देंगे ,
विकास पे हम फिर चल देंगे ,
 डाल के मत को  बदल डालो
राजनीती इस बार
मताधिकार मताधिकार .....
आप भी आकर मत डालो
हम भी आकर मत डाले
आस पड़ोस से कह दो निकलो,
छोड़ के घर बार ,
मताधिकार ...मताधिकार .....
बूंद बूंद से घट है भरता ,
हर एक मत से समाज है बनता ,
राम राज्य का मत  से कर दो
सपना फिर साकार ...
मताधिकार ..मताधिकार ....
यथा राजा तथा प्रजा ,
यथा भूमि  तथा तोयम
आपका  मत बना देगा
जनता की सरकार
मताधिकार मताधिकार
रचयिता ........डॉ आलोक चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

Sunday, January 19, 2020

क्यों जिन्दगी चलती है इस कदर

क्यों जिन्दगी चलती है इस कदर ,
कि कुछ करके भी मौत ही पायी,
और मौत का सब्र भी देखिये जरा ,
पैदा होने के पहले से इंतज़ार में ...............................जिसने सब्र किया वही जीतता है मौत की तरह अंततः

हर दिन मौत और करीब आ जाती है

हर दिन मौत और करीब आ जाती है
ज़िन्दगी खत्म होकर मुकाम पाती है
आलोक चांटिया

कभी कभी मन भी हस लेता है

कभी कभी मन भी हस लेता है ,
कोई ओठो में बस लेता है ,
पर कौन देखता इन आँखों में ,
जो सन्नाटो को भर लेता है ,
हर तरफ हाथो की हल चल ,
कोई पैरो में कुचल लेता है ,
ऐसे तो आलोक है अंधरे में भी ,
पर कौन पश्चिम को वर लेता है ,
चल कर जिन्होंने देखा नंगे पांव ,
वही काँटों से मोहब्बत कर लेता है ,
उनको मालूम है जीवन का मतलब ,
जो एक बार मौत को जी लेता है ,
क्या चलोगी और जिन्दगी यू ही ,
जब मन ओठो का नाम पी लेता है

कितने हताश दिखे तुम



जो मर गए




दर्द में आँखों से जब मोम बहा

दर्द में आँखों से जब मोम बहा ,
तब लगा हांड मांस भी जलता है ,
कुछ लोगो को लगा कि आँसू है ,
किसे बताऊँ ऐसे वो रोज मिलता है@
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हर कोई  कहता है  बिक जाओ मुझसे
बाजार मे खड़े हर रिश्ते ना जाने कबसे 
आलोक चांटिया