Wednesday, January 15, 2020

मुझे दर्द नहीं अब कि

मुझे दर्द नहीं अब  कि वो हमारे नहीं है
खुशी है कि हम किसी के सहारे नहीं है 
आलोक चांटिया

आओ एक बार , मर कर देखते है

आओ एक बार ,
मर कर देखते है ,
कोई कंकड़ ,
नदी में फेकते है ,
वजूद रहे न ,
रहे बीच में कभी ,
एहसास बढ़ती ,
लहरों में देखते है ,
आओ एक बार ,
मर कर देखते है .........................जीवन में सभी का सम्मान है उसके लिए अपने को रावण मत बनाओ
डॉ आलोक चांटिया

आओ मैं एक कविता लिखूं

आओ मैं एक कविता लिखूं
और तुममे मैं फिर दिखूं ,
कितना अरसा हो गया अब ,
कोई सन्नाटा क्यों आज सहूँ ,
क्या मैं आस पास तुम्हारे रहूँ ,
पर ये सब कैसे उनसे कहूँ ,
जो सिर्फ लूटने घसोटने के लिए ,
भारत अब मैं किस पर हसूँ
खुद पर या उन पर जो लेकर ,
तन, मन धन बता मैं कहा बसूं........
आलोक चांटिया

Thursday, January 2, 2020

चिन्ताओ के , भंवर में फसकर

चिन्ताओ के ,
भंवर में फसकर ,
कौन कहाँ ,
जी पाता है ,
स्वप्निल दुनिया ,
के सपने लेकर ,
हर कोई यहाँ ,
पर आता है ,
मिल जाये सभी ,
कुछ तो अच्छा है ,
खो जाने पर ,
पछताता है ,
जो पाया है ,
कर्म के पथ पर ,
कण कण हर क्षण ,
जाने कब बिक जाता है ,
कब समझा मानव ,
दुसरो के दर्द  को ,
खुद के सुख में ,
हस नहीं  वो पाता है ,
धीरे धीरे सब ,
सपने को खोकर ,
पथराई आँखों से वो  ,
श्मशान तलक ही आता है ,
क्यों न समझा आलोक ,
ये छोटा सा मर्म यहाँ ,
अंधकार को सच समझ ,
उसका कैसा ये नाता है ..........
आलोक चांटिया

क्या हम भूल रहे है है की हम जितने भी सुख के पीछे भाग ले और किसी कुचक्र से उसको पा भी ले पर जाना तो है ही .............हम सब अपने पूर्वज के नाम तक नहीं जानते तो आपके इस कार्यो के लिए कौन आपको याद करने जा रहे है ....अगर् ये  सच है तो आइये थोडा भाई चारा और सुकून को जी ले ....................

Wednesday, January 1, 2020

शुभकामना शुभकामना नए साल का

शुभकामना शुभकामना
नए साल का ,
सब करें सामना |
दुःख में दिखे कोई ,
दर्द को कहे कोई ,
हाथ उसी का ,
तुम थामना ,
शुभकामना शुभकामना .
सन्नाटे से पथ हो ,
रात हो अँधेरी ,
चीख सुनी कोई ,
तो उसे जानना ,
शुभकामना शुभकामना
खुशियों के पल हो ,
खुशियों के कल हो ,
जीवन ही ऐसा ,
तुम फिर बांटना,
शुभ कामना शुभकामना
नए साल का ,
सब करें सामना ....................
अखिल भारतीय  अधिकार संगठन आप सभी को आने वाले चक्रीय समय के प्रतीक नव वर्ष के लिए शुभकामना प्रेषित करता है |.......आपका आलोक चान्टिया

बीत गया जो , वो अतीत हो गया

बीत गया जो ,
वो अतीत हो गया ,
आ रहा जो समय ,
वो प्रतीत हो गया ,
कहते है कह कर ,
इसे नव वर्ष मनाओ ,
हर ओठ का आज ,
यही गीत हो गया ,
किया जो प्रबंधन ,
पल पल का आलोक
देखो वो कैसे अब
सब का मीत हो गया ,
बहको न तुम ,
न बहके ही हम सब ,
प्रगति की कहानी में ,
वही जीत हो गया ,
नव वर्ष  जो लाया ,
वह सन्देश समझ लेना ,
सब को मुस्कराने की ,
देखो रीति बन गया !...अखिल भारतीय अधिकार संगठन नव वर्ष 2019 पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामना प्रेषित करता है .................

जो खुद ही , टूट गया हो

जो खुद ही ,
टूट गया हो ,
अपनों से ,
छूट गया हो ,
उस फूल से ,
क्या भगवान पाओगे ?
अपनी ही ,
कृति को बर्बाद देख ,
तुमसे ही उसकी ,
मौत को देख ,
क्या भगवान से ,
कुछ भी करा पाओगे ?....................हम मनुष्य भी भगवान के प्रतिनिधि है पर क्या उनको तोड़ कर हम उस भगवान तक पहुच पाएंगे ???????????? अगर नहीं तो बदलिए अपने चारो तरफ ........ डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन